भारत अपनी अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं में एक बड़ा कदम उठा रहा है। तमिलनाडु के तटीय जिले तूतीकोरिन में स्थित कुलसेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट देश की दूसरी बड़ी लॉन्च सुविधा बनने जा रहा है—श्रीहरिकोटा के साथ—और यह दिसंबर 2026 तक तैयार होने वाला है।
नया स्पेसपोर्ट क्यों?
वर्तमान में इसरो प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से करता है। लेकिन यहाँ एक भौगोलिक समस्या है: ध्रुवीय कक्षा में जाने वाले रॉकेटों को श्रीलंका से बचने के लिए ईंधन-खर्चीली "डॉगलेग मूवमेंट" करनी पड़ती है। कुलसेकरपट्टिनम इस झंझट को समाप्त करता है—भारतीय महासागर के ऊपर सीधी दक्षिण दिशा में उड़ान भरने से ईंधन की बचत होती है और पेलोड क्षमता बढ़ती है। यह इसे छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यानों (SSLVs) के लिए आदर्श बनाता है।
समयरेखा और दायरा
- शिलान्यास
फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया, जिससे भारत के अंतरिक्ष ढांचे में नए अध्याय की शुरुआत हुई। - निर्माण आरंभ
मार्च 2025 में आधारभूत कार्य और फिर असेंबली बिल्डिंग निर्माण के साथ निर्माण कार्य शुरू हुआ। - अनुमानित कमीशनिंग
इसरो का लक्ष्य है कि स्पेसपोर्ट दिसंबर 2026 तक पूरा हो जाए और 2026–27 वित्त वर्ष से सेवा में आ जाए। - क्षमता और उत्पादन
यह परिसर लगभग 2,233 एकड़ में फैला है, जिसे प्रति वर्ष 20–25 SSLV प्रक्षेपण संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनमें निजी कंपनियों के प्रक्षेपण भी शामिल होंगे।
बुनियादी ढाँचा और रणनीतिक महत्व
विकासाधीन मुख्य घटक:
- अपर असेंबली सुविधाएँ (UAF-1 और UAF-2)
- लॉन्च सर्विस बिल्डिंग (LSB)
- ग्राउंड टेस्टिंग, टेलीमेट्री सेटअप और SSLVs के लिए समर्पित लॉन्च पैड
यह स्पेसपोर्ट भारत की व्यापक रणनीति के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य वाणिज्यिक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का विस्तार करना है। यह केवल रॉकेटों तक सीमित नहीं है; यह स्टार्टअप्स को सक्षम बनाने, पेलोड दक्षता बढ़ाने और घरेलू उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं को विकसित करने का भी अवसर है।
अंतिम विचार
कुलसेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं में परिवर्तन का प्रतीक है। 2026 तक SSLV मिशन अधिक कुशलता से, निजी और पेशेवर ढंग से, विशेष रूप से प्रदर्शन के लिए अनुकूलित लॉन्च साइट से उड़ान भरेंगे। जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष और व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, यह सुविधा सुनिश्चित करेगी कि भारत छोटे उपग्रह क्रांति में प्रतिस्पर्धी और सक्रिय बना रहे।
प्रतियोगी परीक्षा हेतु MCQs:
1. भारत का नया स्पेसपोर्ट कहाँ बनाया जा रहा है?
a) श्रीहरिकोटा
b) बेंगलुरु
c) कुलसेकरपट्टिनम
d) विशाखापट्टनम
✅ सही उत्तर: c) कुलसेकरपट्टिनम
2. कुलसेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट कब तक तैयार होने की उम्मीद है?
a) 2025
b) दिसंबर 2026
c) 2027
d) 2030
✅ सही उत्तर: b) दिसंबर 2026
3. कुलसेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a) मानव अंतरिक्ष उड़ान
b) छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLVs)
c) चंद्र मिशन
d) अंतरिक्ष पर्यटन
✅ सही उत्तर: b) छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLVs)
4. श्रीहरिकोटा की तुलना में नया स्पेसपोर्ट किस समस्या का समाधान करता है?
a) भूमि की कमी
b) श्रीलंका से बचने के लिए डॉगलेग मूवमेंट
c) ईंधन की आपूर्ति की कमी
d) भूमध्य रेखा से दूरी
✅ सही उत्तर: b) श्रीलंका से बचने के लिए डॉगलेग मूवमेंट
5. कुलसेकरपट्टिनम परिसर कितने एकड़ में फैला है?
a) 1,000 एकड़
b) 1,500 एकड़
c) 2,233 एकड़
d) 3,000 एकड़
✅ सही उत्तर: c) 2,233 एकड़
6. नया स्पेसपोर्ट प्रति वर्ष कितने SSLV प्रक्षेपण संभालने में सक्षम होगा?
a) 5–10
b) 10–15
c) 20–25
d) 30–35
✅ सही उत्तर: c) 20–25
7. कुलसेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट का शिलान्यास किसने किया?
a) डॉ. जितेंद्र सिंह
b) नरेंद्र मोदी
c) एस. सोमनाथ
d) ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
✅ सही उत्तर: b) नरेंद्र मोदी
8. भारत का दूसरा स्पेसपोर्ट किस राज्य में बनाया जा रहा है?
a) आंध्र प्रदेश
b) कर्नाटक
c) तमिलनाडु
d) केरल
✅ सही उत्तर: c) तमिलनाडु
9. कुलसेकरपट्टिनम किस लॉन्च साइट का पूरक होगा?
a) थुम्बा
b) श्रीहरिकोटा (सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र)
c) बेंगलुरु इसरो मुख्यालय
d) अहमदाबाद स्पेस सेंटर
✅ सही उत्तर: b) श्रीहरिकोटा (सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र)
10. नया स्पेसपोर्ट SSLVs को क्या प्रमुख लाभ देता है?
a) सस्ते उपग्रह
b) सीधा दक्षिणमुखी प्रक्षेपण पथ
c) बड़े रॉकेट
d) कम मौसम बाधा
✅ सही उत्तर: b) सीधा दक्षिणमुखी प्रक्षेपण पथ