शुक्र ग्रह को अक्सर पृथ्वी की “जुड़वां बहन” कहा जाता है, लेकिन इसकी वास्तविकता कहीं अधिक कठोर है। सतह का तापमान 450°C से अधिक, वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी से 90 गुना और सल्फ्यूरिक एसिड के बादलों से घिरा यह ग्रह अन्वेषण के लिए बेहद कठिन माना जाता है। सोवियत काल में शुक्र पर कई सफल मिशन भेजने के बाद रूस ने अब एक नया अध्याय शुरू करने की घोषणा की है: वेनेरा-डी मिशन, जिसे 2034 और 2036 के बीच लॉन्च करने की योजना है। यह मिशन सोवियत वेनेरा परंपरा को पुनर्जीवित करेगा और आधुनिक इंजीनियरिंग के साथ नए वैज्ञानिक उद्देश्यों को जोड़ेगा।
बैलून प्रोब
बैलून 50–60 किमी की ऊंचाई पर तैरेगा, जहां स्थितियां अपेक्षाकृत अनुकूल हैं। यहां यह हवा की गति, बादलों की रसायन प्रक्रिया और सूक्ष्म कणों का अध्ययन करेगा। हाल ही में चर्चित फॉस्फीन जैसी गैसों के अस्तित्व की जांच भी इस प्रोब से हो सकती है।
समयरेखा और विकास योजना
स्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IKI) के अनुसार, प्रारंभिक डिज़ाइन कार्य जनवरी 2026 में शुरू होगा और लगभग दो वर्षों तक चलेगा। इसके बाद परीक्षण और एकीकरण की प्रक्रिया 2030 के दशक की शुरुआत तक चलेगी। अंतिम प्रक्षेपण समय 2034 से 2036 के बीच रखा गया है।
तकनीकी चुनौतियां
शुक्र के वातावरण के लिए अंतरिक्ष यान डिज़ाइन करना अनूठी कठिनाइयाँ पेश करता है:
- 460°C पर काम करने में सक्षम इलेक्ट्रॉनिक्स विकसित करना।
- सल्फ्यूरिक एसिड से भरे वातावरण में सामग्री को सुरक्षित रखना।
- घने बादलों के पार विश्वसनीय संचार स्थापित करना।
- बैलून की सतह को अम्लीय बूंदों से लंबे समय तक सुरक्षित रखना।
वैज्ञानिक उद्देश्य
वेनेरा-डी के वैज्ञानिक लक्ष्य इस प्रकार हैं:
- वायुमंडलीय अध्ययन: बादलों और हवाओं की गति को ट्रैक करना।
- सतही प्रक्रियाएं: सक्रिय ज्वालामुखीय गतिविधि की खोज।
- जलवायु विकास: पृथ्वी और शुक्र के जलवायु अंतर की तुलना।
- संभावित जीवन: वायुमंडल में माइक्रो-निचेस की जांच।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य
नासा के VERITAS और DAVINCI+ मिशन तथा यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का EnVision मिशन भी 2030 के दशक में शुक्र पर जाएंगे। ऐसे में वेनेरा-डी वैश्विक प्रयासों का हिस्सा बन सकता है और वैज्ञानिक सहयोग की संभावना बढ़ सकती है।
शुक्र का महत्व
शुक्र का अध्ययन जलवायु परिवर्तन, ग्रहों के विकास और संभावित रहने योग्य परिस्थितियों को समझने में मदद करता है। यह शोध एक्सोप्लानेट (अन्य तारों के चारों ओर घूमते ग्रहों) की समझ को भी गहरा करता है।
निष्कर्ष
वेनेरा-डी मिशन सोवियत युग की उपलब्धियों और आधुनिक ग्रह अन्वेषण के बीच एक पुल साबित होगा। लैंडर, ऑर्बिटर और बैलून प्रोब के संयोजन से यह मिशन शुक्र ग्रह के बारे में बहु-स्तरीय जानकारी प्रदान करेगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Q.1. वेनेरा-डी के प्रारंभिक डिज़ाइन चरण की शुरुआत किस वर्ष होगी?
a) 2024
b) 2026
c) 2034
उत्तर: b) 2026
Q.2. वेनेरा-डी का कौन सा घटक ऊपरी वायुमंडल में तैरेगा?
a) लैंडर
b) ऑर्बिटर
c) बैलून प्रोब
उत्तर: c) बैलून प्रोब
Q.3. वेनेरा-डी के लिए कौन सा रूसी संगठन प्रमुख एयरोस्पेस कॉन्ट्रैक्टर है?
a) रोसकोसमोस
b) लावोच्किन एसोसिएशन
c) आरएससी एनर्जिया
उत्तर: b) लावोच्किन एसोसिएशन