बिहार के विभिन्न जिलों में आंधी, बारिश, और वज्रपात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण बिजली की अनियमितता एक आम समस्या रही है। इसे ध्यान में रखते हुए, नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (एनबीपीडीसीएल) ने एक नई पहल की है। कंपनी अब "स्पाइक अर्थिंग" नामक एक उन्नत तकनीक को अपना रही है, जिसे पश्चिम बंगाल में पहले से ही सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है।
एनबीपीडीसीएल ने इस तकनीक को मुजफ्फरपुर सहित अन्य जिलों में लागू करने की योजना बनाई है। फिलहाल, इसे पायलट प्रॉजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है और इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान भी किए जा रहे हैं। इस परियोजना की सफलता के बाद, इसे बिहार के अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा, जिससे आंधी, बारिश, और वज्रपात के दौरान बिजली आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सके।
स्पाइक अर्थिंग तकनीक: क्यों है महत्वपूर्ण?
बिहार में तेज आंधी और भारी बारिश के दौरान बिजली की समस्या आम हो जाती है। इन परिस्थितियों में, बिजली के तारों और इंसुलेटरों के जलने जैसी समस्याएं अक्सर सामने आती हैं, जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है। नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी ने इन समस्याओं को हल करने के लिए स्पाइक अर्थिंग तकनीक को अपनाने का फैसला किया है।
स्पाइक अर्थिंग का मुख्य उद्देश्य बिजली के संचरण लाइनों को आंधी और मूसलाधार बारिश के दौरान बिजली के नुकसान से बचाना है। इस तकनीक के तहत, 11 केवी और 33 केवीए के पोलों में 25 गुणा 6 मिमी के 1.5 मीटर जीएल फ्लैट और 2.5 मीटर लंबे स्पाइक अर्थिंग इलेक्ट्रोड का उपयोग किया जाएगा। ये इलेक्ट्रोड विशेष छेदों के साथ आते हैं, जो सिस्टम के इंसुलेशन को सुरक्षित रखते हैं।
मुजफ्फरपुर में स्पाइक अर्थिंग का ट्रायल
मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी, कांटी, औराई, कटरा, गायघाट, मड़वन, और अन्य प्रखंडों में बारिश के दिनों में बिजली आपूर्ति में बार-बार बाधाएं आती हैं। इन क्षेत्रों में इंसुलेटर जलने, तार जलने और ब्रेकडाउन की समस्याएं बहुत आम हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए, एनबीपीडीसीएल ने जिले के चार प्रमुख विद्युत संचरण लाइनों में से एक पर स्पाइक अर्थिंग का ट्रायल करने का निर्णय लिया है।
हाल ही में, उत्तर बिहार में आई तेज आंधी-बारिश के दौरान वज्रपात के कारण मुजफ्फरपुर के कांटी, मड़वन, कुढ़नी, औराई और मीनापुर में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। कुछ क्षेत्रों में बिजली छह दिनों तक नहीं थी, जिससे ना केवल बिजली कंपनी को राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि उपभोक्ताओं की नाराजगी का सामना भी करना पड़ा। इस स्थिति से निपटने के लिए, स्पाइक अर्थिंग की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है और अगले एक सप्ताह के अंदर इस पर कार्य शुरू होने की संभावना है।
सर्किल में स्पाइक अर्थिंग का प्रयोग
एनबीपीडीसीएल के एक इंजीनियर ने बताया कि स्पाइक अर्थिंग तकनीक का पश्चिम बंगाल में बिजली संचरण लाइनों में व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। वहां पर यह तकनीक तेज आंधी, भारी बारिश और वज्रपात के दौरान भी बिजली आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने में सहायक साबित हुई है। इसी सफलता को ध्यान में रखते हुए, एनबीपीडीसीएल ने इस तकनीक को बिहार में भी लागू करने की योजना बनाई है। प्रारंभिक चरण में इसे किशनगंज में परीक्षण के रूप में लागू किया जाएगा और परीक्षण की सफलता के बाद इसे मुजफ्फरपुर सर्किल में भी विस्तारित किया जाएगा।
क्या है स्पाइक अर्थिंग तकनीक?
स्पाइक अर्थिंग तकनीक का मुख्य उद्देश्य बिजली संचरण लाइनों को प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाले नुकसान से बचाना है। इस तकनीक में 11 केवी और 33 केवीए के पोलों पर 25 गुणा 6 मिमी के 1.5 मीटर जीएल फ्लैट और 2.5 मीटर लंबे स्पाइक अर्थिंग इलेक्ट्रोड का उपयोग किया जाता है। ये इलेक्ट्रोड विशेष छेदों के साथ डिज़ाइन किए गए होते हैं, जो सिस्टम के इंसुलेशन को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। इस तकनीक का उपयोग विशेष रूप से आंधी, भारी बारिश, और वज्रपात जैसी परिस्थितियों में बिजली आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने के लिए किया जाता है।
इस तकनीक के सफलतापूर्वक लागू होने से बिहार में आंधी और बारिश के दौरान होने वाली बिजली की समस्या से निजात मिलेगी और बिजली आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित होगी।