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भागलपुर में गंगा नदी पर बनेगा एक और पुल, मोदी कैबिनेट से 2549 करोड़ की मंजूरी

नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने बिहार में एक नई रेलवे लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत भागलपुर में गंगा नदी पर एक विशाल पुल का निर्माण किया जाएगा। यह पुल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन को और सुगम बनाएगा, जिससे यात्रा और अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार (09/08/2024) को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने रेल मंत्रालय की आठ परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनमें से एक बिहार में है। समिति ने विक्रमशिला-कटरिया रेलवे लाइन के लिए 2549 करोड़ रुपये की लागत को मंजूरी दी है, जिसके अंतर्गत भागलपुर में गंगा नदी पर नया पुल बनाया जाएगा। यह भागलपुर का पहला और बिहार का पांचवां रेल पुल होगा।

भागलपुर में फिलहाल विक्रमशिला सेतु, उसके समानांतर निर्माणाधीन नया पुल, और सुल्तानगंज-अगुवानी पुल सड़क पुल के रूप में हैं। नया रेल पुल लगभग 26.23 किलोमीटर लंबा होगा, जो न केवल दो नेशनल हाइवे को जोड़ेगा, बल्कि कोसी और सीमांचल क्षेत्र को पूर्वी बिहार यानी अंग क्षेत्र से भी रेल संपर्क प्रदान करेगा।

यह परियोजना कई वर्षों से लंबित थी। वित्तीय वर्ष 2016-17 में इसे बजट में शामिल किया गया था, जिसमें लगभग 4500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव था। एक साल पहले इस परियोजना के एलाइनमेंट के लिए ड्रोन सर्वेक्षण किया गया। रेल टेल कंपनी द्वारा किए गए इस सर्वे में पाया गया कि अधिकांश जमीन गंगा नदी क्षेत्र में है, जिससे भूमि अधिग्रहण में कोई बड़ी समस्या नहीं होगी।

वाई आकार का पुल

भागलपुर में गंगा नदी पर प्रस्तावित नया रेल पुल वाई आकार का होगा। इस पुल से दोनों दिशाओं में रेल लाइनों का जुड़ाव होगा। उत्तर में कटरिया और नवगछिया तथा दक्षिण में विक्रमशिला और शिवनारायणपुर स्टेशन के पास बटेश्वर स्थान से यह लाइनें जुड़ेंगी। नई रेल लाइन के प्रस्ताव से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी और गतिशीलता में सुधार होगा। मुख्य पुल की लंबाई 2.5 किलोमीटर होगी, जो उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करेगा।

यह पुल बिहार, झारखंड, और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी को भी बढ़ाएगा, साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न जिलों को आपस में जोड़ सकेगा। इसके अलावा, कोसी क्षेत्र का भागलपुर, गोड्डा, दुमका, देवघर, रांची आदि शहरों से रेल संपर्क और आसान हो जाएगा। यह पुल उत्तर और पूर्वी भारत के लिए एक अतिरिक्त रेल कॉरिडोर का काम करेगा, जिसे "मेगा रेल कॉरिडोर" नाम दिया जाएगा।

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Prerna Payal

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