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राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF): सतत कृषि की ओर एक कदम

भारत सरकार ने सतत और रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) की शुरुआत की है। यह मिशन 25 नवंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत किया गया था, जिसमें ₹2,481 करोड़ की राशि आवंटित की गई है। इस योजना के तहत आगामी दो वर्षों में 1 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाने और 7.5 लाख हेक्टेयर भूमि को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मिशन 'भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति' और 'गोबरधन मिशन' जैसे पिछले प्रयासों को समेकित करता है और 'शून्य बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF)' को बढ़ावा देता है।

मिशन के मुख्य उद्देश्य

NMNF का उद्देश्य रासायनिक मुक्त, जैव-आधारित और स्थानीय संसाधनों पर आधारित खेती को बढ़ावा देना है। यह मृदा स्वास्थ्य में सुधार, लागत में कमी, और दीर्घकालिक उपज को सुनिश्चित करने की दिशा में एक समग्र दृष्टिकोण अपनाता है।

वित्तीय आवंटन

मिशन के लिए कुल ₹2,481 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें ₹1,584 करोड़ केंद्र सरकार द्वारा और ₹897 करोड़ राज्यों द्वारा योगदान किया जाएगा। यह धनराशि वर्ष 2025-26 तक वितरित की जाएगी।

क्रियान्वयन रणनीति

मिशन को ग्राम पंचायत स्तर पर 15,000 क्लस्टरों के माध्यम से लागू किया जाएगा। इन क्लस्टरों में प्राथमिकता उन किसानों को दी जाएगी जो पहले से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं या जो राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े हैं।

प्रशिक्षण और मॉडल फार्म

कृषकों को प्रशिक्षण देने के लिए देशभर में 2,000 मॉडल फार्म स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) और कृषि विश्वविद्यालयों (AUs) में विकसित किया जाएगा। इन मॉडल फार्मों में जीवामृत, बीजामृत आदि जैसे प्राकृतिक इनपुट तैयार करने के तरीके सिखाए जाएंगे। साथ ही 30,000 'कृषि सखी' किसानों को मार्गदर्शन देने के लिए नियुक्त की जाएंगी।

जैव-इनपुट संसाधन केंद्र (BRCs)

मिशन के अंतर्गत 10,000 जैव-इनपुट संसाधन केंद्र (BRCs) की स्थापना की जाएगी, जो किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक तैयार इनपुट उपलब्ध कराएंगे। यह केंद्र रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करेंगे।

वैज्ञानिक चिंताएं और चुनौतियां

वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल जैविक साधनों से कुछ फसलों, जैसे धान, की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाना कठिन हो सकता है। इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्त्वों की आवश्यकता अधिक होती है, जो जैविक खादों से पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते, जिससे उत्पादकता पर असर पड़ सकता है।

पूर्व प्रयासों से संबंध

यह मिशन 2019-20 में शुरू हुए ‘भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति’ कार्यक्रम और ‘गंगा प्राकृतिक खेती गलियारा’ जैसे पहलुओं पर आधारित है। इन प्रयासों से मिले अनुभव को इस मिशन में समाहित किया गया है ताकि इसे पूरे देश में लागू किया जा सके।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Q.1. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के लिए कुल वित्तीय प्रावधान कितना है?

a) ₹1,000 करोड़
b) ₹3,500 करोड़
c) ₹2,481 करोड़

उत्तर: c) ₹2,481 करोड़

Q.2. NMNF योजना के तहत कितने किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है?

a) 50 लाख
b) 1 करोड़
c) 2 करोड़

उत्तर: b) 1 करोड़

Q.3. निम्न में से कौन सा कार्यक्रम NMNF में एकीकृत किया गया है?

a) पीएम-किसान योजना
b) भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति
c) मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना

उत्तर: b) भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति

Q.4. जीवामृत और बीजामृत क्या हैं?

a) पारंपरिक सिंचाई उपकरण
b) जैविक खेती में प्रयोग होने वाले इनपुट्स
c) आनुवंशिक रूप से संशोधित बीज

उत्तर: b) जैविक खेती में प्रयोग होने वाले इनपुट्स

Q.5. जैव-इनपुट संसाधन केंद्र (BRCs) का कार्य क्या है?

a) रासायनिक उर्वरक बेचना
b) प्राकृतिक खेती के लिए इनपुट उपलब्ध कराना
c) कृषि उपकरणों का आयात

उत्तर: b) प्राकृतिक खेती के लिए इनपुट उपलब्ध कराना

Q.6. वैज्ञानिकों द्वारा प्राकृतिक खेती को लेकर कौन सी चुनौती उजागर की गई है?

a) खेती की लागत अधिक होना
b) मृदा में पोषक तत्वों की कमी
c) जल उपयोग में वृद्धि

उत्तर: b) मृदा में पोषक तत्वों की कमी

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